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केन्द्रीय सैनिक बोर्ड

भारत सरकार ने दिनांक 7 सितंबर, 1919 के अपने संकल्प द्वारा केन्द्रीय भर्ती बोर्ड की कार्य पद्धति को रोक दिया था और उसके स्थान पर सेवारत, सेवायुक्त तथा दिवंगत भारतीय सैनिकों और गैर-लड़ाकू सैनिकों एवं उनके आश्रितों के हितों को प्रभावित करने वाले मामलों के बारे में सलाह देने के लिए भारतीय सैनिक बोर्ड नाम से एक नया बोर्ड बनाया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नौसेना और वायुसेना के निरंतर विस्तार के कारण तीनों से संबंधित समान कार्यों को करने के लिए एक अकेले संगठन की आवश्यकता महसूस की गई थी और इसके परिणामस्वरूप 1944 में इस बोर्ड को पुनर्गठित किया गया था। मार्च 1951 में भारतीय सैनिक, नौसैनिक और वायु सैनिक बोर्ड के रूप में इसका पुनःनामकरण किया गया था।

वर्ष 1975 में केन्द्र में इसका नाम बदलकर केन्द्रीय सैनिक बोर्ड और राज्य तथा जिला स्तर पर राज्य सैनिक बोर्ड और जिला सैनिक बोर्ड कर दिया गया था। भारत सरकार की अधिसूचना संख्या 10(02)/I/रक्षा (पुनर्वास)/2007 दिनांक 29.1.2009 द्वारा भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग के अधीन उसके संबद्ध कार्यालय के तौर पर कार्य करता है। राजपत्र अधिसूचना दिनांक 26.12.2019 के अनुसार इस बोर्ड के मौजूदा संघटन में अध्यक्ष (माननीय रक्षा मंत्री), उपाध्यक्ष (माननीय रक्षा राज्य मंत्री), सचिव (सचिव केन्द्रीय सैनिक बोर्ड), और 45 सदस्य हैं जिनमें विभिन्न राज्यों/ संघराज्य क्षेत्रों के मुख्यमंत्री/ उपराज्यपाल, संसद सदस्य, सेना प्रमुख, सरकारी अधिकारी और भूतपूर्व सैनिक शामिल हैं। केन्द्रीय सैनिक

बोर्ड सचिवालय का अध्यक्ष ब्रिगेडियर या नौसेना/ वायुसेना का समकक्ष रैंक का अधिकारी होता है।

हालांकि भूतपूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों का कल्याण केन्द्र और राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों का संयुक्त उत्तरदायित्व है फिर भी अधिकांश समस्याएं राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों को ही सुलझानी होती है। केन्द्र में अपने केन्द्रीय सैनिक बोर्ड की तरह राज्य/ जिला सैनिक बोर्ड संबंधित राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों/ जिलों में निवास कर रहे भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं और उनके आश्रितों के लिए पुनर्वास और कल्याणकारी योजनाओं हेतु नीतियां बनाने और उनका क्रियान्वयन करने के लिए उत्तरदायी है। इस बारे में केन्द्र सरकार की सहायता के लिए देश में 34 राज्य सैनिक बोर्ड और 407 जिला सैनिक बोर्ड हैं। राज्य सैनिक बोर्डों और जिला सैनिक बोर्डों की स्थापना पर होने वाला व्यय केन्द्र और राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों के बीच विशेष श्रेणी के राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश) के लिए 75:25 के आधार पर और शेष राज्यों के लिए 60:40 के आधार पर साझा किया जाता है।

सचिव, केन्द्रीय सैनिक बोर्ड, भूतपूर्व सैनिकों/ विधवाओं के पुनर्वास और कल्याण के लिए नीतियों के संबंध में राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों में सैनिक कल्याण विभाग को सलाह देता है और भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं, और सेवा से बाहर किए असमर्थ निःशक्त कार्मिकों और उनके आश्रितों के पुनर्वास संबंधी नीतियों के क्रियान्वयन तथा उनकी सफलता के बारे में निदेशक, सैनिक कल्याण विभाग/ सचिव, राज्य सैनिक बोर्ड और जिला सैनिक कल्याण अधिकारी/ सचिव, जिला सैनिक बोर्ड से रिपोर्टें मांगता है। राज्य/ संघ राज्य क्षेत्र सरकारों द्वारा आवंटित निधियों और एकीकृत विशेष निधियों से वित्त पोषित आश्रितों के लिए अपेक्षित कल्याण स्कीमों के बारे में भी सलाह दी जाती है।

राज्य स्तर पर, भूतपूर्व सैनिकों का पुनर्वास और कल्याण राज्य सरकार के एक मंत्रालय द्वारा किया जाता है और संबंधित विभाग का सचिव सैनिक कल्याण विभाग के इस कार्य का निरीक्षण करता है। सैनिक कल्याण विभाग, जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों जिनमें से कुछ में एक से अधिक राजस्व जिले आते हैं का सामान्य प्रशासन एवं पर्यवेक्षण करता है। राज्य में उस राज्य का मुख्यमंत्री राज्य सैनिक बोर्ड का अध्यक्ष होता है और कलेक्टर जिला सैनिक बोर्ड का अध्यक्ष होता है। राज्य सैनिक बोर्डों के सचिव अनिवार्य रूप से सैनिक कल्याण बोर्ड के निदेशक और जिला सैनिक बोर्डों के सचिव जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के अधिकारी होते हैं। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड की स्थापना ऐसे जिलों में की जाती है जहां भूतपूर्व सैनिकों, विधवाओं, आश्रितों और पीछे छोड़ गए सेवारत रक्षा कार्मिकों के परिवारों की संख्या 7500 और उससे अधिक है। हालांकि कुछ जिलों में दूरस्थ/पहाड़ी क्षेत्रों में न्यूनतम 7500 संख्या की सीमा में नियमों में यथा निर्धारित छूट दी जा सकती है।

अधिक सूचना के लिए कृपयाः http://ksb.gov.in/पर क्लिक करें।